एक वेश्या का वीरांगना से वारांगना तक का सफर…

भैरंट किस्से

ऋतु सौंदर्य, भोपाल।

यहां गलियां मेरी महकती, ये सिर्फ रातों को चमकती, है आत्मा भभकती, पर काम में दमकती,

सुरमा मेरा ये काला है, और मुंह पर बंद ताला है, ये मांग मेरी खाली है, क्यों लोग देते गाली हैं?
क्यों लोग देते गाली है?

‘वेश्या’ एक ऐसा शब्द जिससे एक स्त्री का चरित्र भलीभांति मापा जा सकता हैं। कितना आसान है ना एक स्त्री की संपूर्ण लज्जा, प्रेम, नैतिकता और उसकी आत्मा पर सीधे सवाल उठा देना। आधुनिकता के इस दौर में पुराने ज़माने की ‘दासी प्रथा’ से कब नवीन दौर के ‘प्रॉस्टिट्यूट सिस्टम’ में तब्दील हो गई पता ही नहीं चला। कब हमने सिर्फ एक नर्तकी या लोकांगना की छवि को अपने मक़सद के लिए एक ‘धंधा’ बना दिया। वेश्यावृत्ति के कारणों को जाने बिना ही समाज इन वेश्याओ को बुरी दृष्टि से देखता हैं, जबकि इस समस्या के लिए कहीं ना कहीं हमारा समाज ही उत्तरदाई हैं। आज देश 5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के सपने को साकार करने के लिए आगे बढ़ रहा है, पर जिस देश की लाखों महिलएं असुरक्षित हैं वहां पर अगर हम इस सपने को पूरा भी कर लें तो ये एक लबो-लुआब से भरा झूठ ही होगा. गौरतलब है कि वो औरते हैं जिन्हें समाज ने वेश्या बोलकर अपने हाल पर छोड़ दिया वो कभी अपनी मर्जी से इस दलदल में नहीं आईं. ये पेट की वो आग है जो किसी औरत को उसका जिस्म बेचने पर मजबूर कर देती है.

एक अध्ययन के मुताबिक ज्यादातर लड़कियां जब इस दलदल में आती हैं उनकी उम्र 13 साल से भी कम होती है, और वजह होती है यौन शोषण या बलात्कार। बता दें कि पूरे विश्व में क़रीब 42 मिलियन वेश्याएं इनकी मजबूत जंजीरों में बंधी हैं। अध्ययनकर्ता ससैन के हंटर और के.सी रीड ने बताया कि 80% वेश्याओं का बलात्कार होता हैं, जिसमें उनकी कोई मर्ज़ी शामिल नहीं होती।

लाखों बिस्तर बदलती हूं, एक नींद सोने को तरसती हूं,
मुश्किल होता है खुद को परोसना, उसके बाद खुद में, मैं बिखरती हूं,
कितनी बीमारियों से जूझता शरीर है, इस चार दिवारी में मेरा जिस्म ही वज़ीर है।

भारत जैसे देश में आज भी सदियों पुरानी परंपराओं में जकड़ी एक ऐसी दुनिया मौजूद है, जहां सदियों से महिलाओं के साथ अत्याचार और उनके वजूद को तार-तार करने जैसी घटनाएं चली आ रही हैं। हर रोज सजने वाले जिस्म के बाजार में चमक धमक से भरपूर रोशनी तो हमें दिखाई देती है, लेकिन नहीं दिखते उनके आंसू, मजबूरी, लाचारी और उनका बयां ना कर पाने वाला दर्द। एक सर्वे के अनुसार, भारत में लगभग 30 लाख यौनकर्मी हैं, जिसमें 1,00,000 मुंबई में हैं। बता दें कि कोलकाता का “सोनागाछी” एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया है।

हमारा देश में कानून बनते तो बहुत है पर लागू नहीं हो पाते। जहां तक भारतीय कानून का सवाल है, वेश्यावृत्ति को भारत में अवैध नहीं माना जाता है। इसके बावजूद भी भारतीय दंड संहिता में यह कहा गया है कि वेश्यावृत्ति से संबंधित कुछ गतिविधियाँ भारतीय कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं। जो निम्नलिखित हैं।

  • सार्वजनिक स्थानों पर यौन संबंधों के लिये आग्रह करना।
  • होटलों में ऐसी गतिविधियों को पूरा करना
  • यौन प्रयोजनों के लिए गाड़ी में किसी को लुभाने के लिए फुटपाथ किनारे खड़े होना।
  • वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देने वाले दलाल।
  • एक वेश्यालय का मालिक होने के नाते एक से अधिक वेश्यालय चलाना।
  • दलाल द्वारा वेश्यावृत्ति के लिए महिलाओं को मजबूर करना।

मुश्किल है एक वेश्या का जीवन। कितना मुश्किल है उनके दर्द को समझना, कितना मुश्किल है एक वीरांगना से वारांगना बनना


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