पटौदी रियासत का वो नवाब जो 21 साल की उम्र में बना क्रिकेट कप्तान, सड़क हादसे में खोई आंख, फिर बन गया ‘टाईगर’…

भैरंट किस्से

कुलदीप शर्मा, विदिशा।

मंसूर अली खान पटौदी यानि की नबाब पटौदी, शायद ही कोई होगा जो इस शख्सियत को नहीं जानता हो।भोपाल के नवाब और पूर्व इंडियन क्रिकेट टीम के कप्तान जूनियर पटौदी को क्रिकेट के मैदान का टाईगर कहा जाता था. अपने स्कूल के समय से ही बल्लेबाजी का हुनर दिखाते पटौदी ने पब्लिक्स स्कूल रैकेट्स चैंपियनशिप अपने नाम कर ली थी।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के लिए खेलने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी का जन्म भोपाल में 5 जनवरी 1941 को हुआ था। उनके पिता इफ्तिखार अली खान भी एक मशहूर क्रिकेटर थे। पटौदी की शुरुआती पढ़ाई अलीगढ़ के मिंटो सर्कल और आगे की पढ़ाई देहरादून के वेल्हैम बॉयज स्कूल में हुई। ऑक्सफोर्ड बैलिओल कॉलेज से अरेबिक और फ्रेंच की तालीम लेने वाले पटौदी ने हर्टफोर्डशायर के लॉकर्स पार्क प्रेप स्कूल से अपनी पढ़ाई शुरू की थी।

क्रिकेट के मैदान में “टाईगर” कहे जाने वाले पटौदी जिंदगी के खेल में भी टाईगर ही थे। एक कार ऐक्सीडेंट में अपनी बाईं आंख हमेशा के लिए खो देने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पटौदी ने अपने जुनून के बल पर कुछ ही समय में मैदान में वापसी की। घंटों नेट प्रैक्टिस करने के बाद वह एक आंख के साथ ही शानदार खेल दिखाया. वह कहते हैं ना शेर घायल होने के बाद और भी खूंखार हो जाता है।

आंख में खराबी के बाद भी उन्होंने सिर्फ 6 महीने के अंदर ही मैदान पर वापसी की। नबाब पटौदी ने अपने करियर का पहला टेस्ट दिल्ली में इंग्लैंड के खिलाफ खेला था। उन्होंने चैन्नई में अपने तीसरे ही टेस्ट में 103 रन की धमाकेदार पारी के साथ भारत को इंग्लैंड के खिलाफ पहली सीरीज जिताकर अपनी काबिलियत का लौहा मनवा लिया।

1962 में उन्हें वेस्टइंडीज टूर के लिए वाइस कैप्टन और मार्च 1962 में भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया।

21 साल 77 दिन की उम्र में पटौदी दुनिया के सबसे कम उम्र के कप्तान बने। 1962 में इंडियन क्रिकेटर ऑफ द ईयर और 1968 में विस्डन क्रिकेटर ऑफ द ईयर बने। उन्होंने 1969 में अपनी आटोबॉयोग्राफी ‘टाइगर्स टेल’ प्रकाशित की. पटौदी 1974-75 में भारतीय टीम के मैनेजर भी रहे।


पटौदी ने मशहूर फिल्म अभिनेत्री शर्मिला टैगोर से शादी की थी। उनके तीनों बच्चे अभिनेता सैफ अली खान, अभिनेत्री सोहा अली खान और ज्वेलरी डिजाइनर सबा अली खान भी कामयाबी की कई इबारतें गढ़ रहे हैं।

मैदान और असल जिंदगी का ये टाईगर 22 सितंबर 2011 को इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गया।


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