हम उस देश के वासी हैं जिस देश में चिकित्सा डंडे से होती है…

मनोज कांत मिश्र| मर्यादा पुरुषोत्तम राम जब घर से बाहर वन के लिए निकले तो अपने समस्त राजसी संशाधन छोड़ दिये और एक सन्त वेश में जंगलो में रहे और […]

भोपाल में सड़कों के किनारे स्थिति खराब है, हैं अगर वो इंसान तो उनकी परिस्थिति खराब है…

तेजस ठाकुर, हरदा। “भोपाल में सड़कों के किनारे स्थिति खराब है हैं अगर वो इंसान तो उनकी परिस्थिति खराब है”… एक सूखी रोटी के टुकड़े चार पके आम का अचार […]

लगा ज़ोर सूरज दिखला दे…

कुलदीप शर्मा, विदिशा। उठाले अपनी सख़्त भुजाएँ दिखादे अपनी सभी कलाएँ लाँघ दे सारी बनी हदों को तोड़ दे सारी खड़ी शिलाएँ आज अँधेरा अभी मिटादे लगा ज़ोर सूरज दिखलादे […]

अब सरफरोशी की तमन्ना करना ही बेकार है…

अगर आज के परिदृश्य को क्रांतिकारी देखते तो वो किस तरह अपनी भावनाओं को व्यक्त करते, उनकी वेदना को प्रकट करती कविता “निसर्ग दीक्षित” की कलम से… फांसी के तख्त […]

तुम अगर मेरे गांव की लड़की होती­…

  तेजस ठाकुर की कलम से… तुम अगर मेरे गांव की लड़की होती­… सोचो क्या होता अगर तुम मेरे गांव की लड़की होती मेरे गांव का हर लड़का तुम्हारे मोहल्ले […]