फिर खुल गया भगत सिंह की फांसी का केस?

जिया खिलाड़ी

मधु चतुर्वेदी, लेखक,मुम्बई।

बहुत कम लोगो को पता है “शहीद भगत सिंह” को जिन आरोपो के आधार पर फांसी दी गयी थी उस “सैंडर्स मर्डर केस” की फ़ाइल लाहौर {पाकिस्तान} के कोर्ट मे इस साल फरवरी 2016 में “री ओपन” की गयी है | पाकिस्तान में भी भगत सिंह का नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है और यही की लाहौर अदालत में ही अंग्रेजी हुक्मनामों ने भगत सिंह को फांसी के तख़्त पर चढ़ाया था | शहीद भगत सिंह की मृत्यु के पश्चात भी ये केस लड़कर पाकिस्तान की “भगत सिंह फाउंडेशन” नामक संस्था उन्हें सभी आरोपों से बाईज्ज़त बरी करवाना चाहती है | शहीद हो चुका 23 साल का वो क्रांतिकारी युवा तो केस जीतने के बाद भी हमें वापस नही मिलने वाला लेकिन भगत सिंह की पैरवी कर रहे पाकिस्तानी वकील राशीद का कहना है कि ये शहीद के अस्मिता और सम्मान की लड़ाई है | वकील राशिद केस जीतने और भगत सिंह के परिजनों को तगड़ा मुआवजा दिलाने का भी ठान के बैठे है |
पैरवी में दिए जा रहे अनसुने तर्क काफी मजबूत है .
1 .अँगरेज़ सरकार भगत सिंह की बढ़ती लोकप्रियता और युवाओं पर उनके व्यापक प्रभाव को लेकर चिंतिति थी |
2 .सरकारी अफसर किसी भी कीमत पर भगत सिंह को रास्ते से हटाकर खिलाफत की इस क्रान्ति की रीढ़ तोड़ना चाहते थे |
3 . 2016 में फ़ाइल खुलवाई गई तो केस की कोई एफ.आई.आर. ही नही दर्ज की गयी है फिर राजगुरु , भगतसिंह और सुखदेव अपराधी कैसे हुए ??
4 .घटना के 450 गवाह थे जिन्हें गवाही के लिए मौका ही नही दिया गया । कही ऐसा तो नही अँगरेज़ अफसर इस हमले में मामूली रूप से घायल था और बाद मे किसी अनहोनी में उसकी मौत हुई??
5 .केस की पूरी सुनवाई के दौरान अदालत में कोई क्रास एक्ग्जामिनेसन नही किया गया |
6 .जज द्वारा निर्धारित तारीख से एक दिन पहले ही फांसी दे दी गयी |
7 .जेल के बाहर जनता के होते जमवाड़े को देखते हुए सारे सरकारी नियम ताक पर रख उन्हें सूर्यास्त के बाद शाम 7.30 बजे फांसी दी ।

लोग बताते है अँगरेज़ जज और पुलिस भी दुबले पतले ,23 साल के इस सिख की दिलेरी देख हैरान थे | भगतसिंह ने अदालत में सीना तान , गर्वीली नज़र से अपने लिए फांसी की सजा सुनी और फंदे की ओर बेख़ौफ़ मुस्कान के साथ शाही चाल से बढ़े |
तत्कालीन अंग्रेजी सरकार की चूले हिला देने वाले , अमानवीय दमनकारी नीतियों का शिकार हुए स्वतंत्रता संग्राम के शेर , जननायक को नमन।

-लेख में लेखक के निजी विचार है।

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