गोविंद नगर विधान सभा उपचुनाव में देखना होगा कि चुनाव में किसका ‘करिश्मा’ चलेगा और कौन बनेगा जनता के दिलों का ‘सम्राट’?

खबर-सार

एक नजर में चुनाव-

उपचुनाव में वोटिंग डेट- 21-10-2019

रिजल्ट डेट- 24-10-2019

पिछले चुनाव के परिणाम- सत्यदेव पचौरी (बीजेपी)

कुल मतदाता- 3,49,180 (2017)

कुल बूथ- 343

मनोज कांत मिश्र। कानपुर के गोविंद नगर विधान सभा के उपचुनाव को लेकर पूरे जिले नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है, इस चुनाव में जहां भाजपा अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही है। वहीं, कांग्रेस और सपा ने इस चुनाव में युवा चेहरों को उम्मीदवार बनाकर जनमत जुटाने का प्रयास किया है। इसी क्रम में जिले सहित प्रदेश में अपनी जमीन तलाश रही बसपा ने कांग्रेस से आए हुए व्यक्ति को उम्मीदवार बनाकर कहीं न कहीं कार्यकर्ताओं को निराश करने का काम किया है। 

प्रत्याशी को लेकर पार्टियों की तिकड़म-

इस चुनाव में जहां भाजपा ने जिलाध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी कोे टिकट देकर अपने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया है कि यदि अच्छा काम करते रहेंगे तो वक्त आने पर सम्मान मिलेगा। वहीं कांग्रेस और सपा ने युवा छात्र राजनीति को तवज्जो देकर प्रदेश में युवाओं को जोड़कर अपनी राजनीति जमीन मज़बूत करने का प्रयास किया है। कांग्रेस की प्रत्याशी करिश्मा ठाकुर जहां एनएसयूआई की राष्ट्रीय महासचिव पद पर होने के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के सचिव पद पर भी रह चुकी हैं, वहीं सपा के छात्र सभा के उपाध्यक्ष सम्राट विकास यादव छात्र राजनीति के साथ मुख्यधारा की राजनीति में भी काफी सक्रिय है। 

“इस चुनाव की सबसे खास बात यह है कि बसपा को छोड़ सभी प्रत्याशियों का यह पहला चुनाव है और जहां इसमें बसपा और भाजपा से संगठन के खिलाड़ी तो सपा और कांग्रेस से युवा नेता अपनी किस्मत अजमा रहे हैं। 21 अक्टूबर को वोटिंग के बाद 24 अक्टूबर को परिणाम घोषित होंगे।”

जातिगत-बकैती-

जातिगत रूप से सवर्ण जाति की इस सीट में पिछले चुनाव में बीजेपी के सत्यदेव पचौरी ने कांग्रेस के अंबुज शुक्ला को 57,156 वोट से पराजित किया था। इस चुनाव में भाजपा ने अपने कैडर वोट को ध्यान में रखते हुए उत्तराखड़ के ब्राह्मण सुरेंद्र मैथानी को तो बसपा ने देवी तिवारी को अपना प्रत्याशी घोषित किया। वहीं कांग्रेस ने ठाकुर प्रत्याशी व सपा ने ओबीसी प्रत्याशी को टिकट देकर पिछड़ा वर्ग के वोट बैंक को साधने का काम किया है।

प्रत्याशियों की जन्मकुंडली-

संगठन के साथ कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़, सर्वमान्य नेता

भाजपा के प्रत्याशी सुरेंद्र मैथानी पार्टी के कुशल संगठनकर्ताओं में से एक हैं और कार्यकर्ताओं में उनकी अच्छी पैठ मानी जा रही है। उनसे जातिगत समीकरण भी साधने का भी प्रयास है क्योंकि वह ब्राह्मण हैं। यह भाजपा की परंपरागत सीट मानी जाती है, यहां पर ब्राह्मण वोटरों पर पूरा समीकरण रहता है।गोविंदनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का टिकट मांगने वालों की कतार भाजपा में खासी लंबी थी। जिस वजह से मैथानी को टिकट देकर भाजपा ने भीतरी उठापटक को खत्म करने का काम किया है।

यूएसपी- भाजपा समेत संघ में कई सालों से सक्रिय, कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़। साथ ही कई चुनाव को संगठन स्तर में जीतने का अनुभव। संगठन निचले स्तर तक मजबूत हुआ। समाजवादी छात्र सभा में पदाधिकारी सम्राट विकास यादव को प्रत्याशी बनाकर पार्टी ने यही संदेश दिया है। गोविंदनगर विधानसभा के लिए भाजपा को छोड़ अब सारे दलों के पत्ते खुल चुके हैं। देर रात तक भाजपा भी प्रत्याशी का एलान कर सकती है।

चुनाव में सबसे कम उम्र की युवा प्रत्याशी, लेकिन विधान से वो और उनसे विधान सभा अंजान

कांग्रेस की प्रत्याशी करिश्मा ठाकुर वर्तमान में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई की राष्ट्रीय महासचिव हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई कर रही हैं। करिश्मा ने 2013 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में सचिव के पद पर जीत दर्ज की थी। उनके पिता यूपी की राजनीति में सक्रिय हैं, वे लोकसभा और विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं हालांकि कामयाबी नहीं मिली। करिश्मा ठाकुर के पति विपिन सिंह भी एनएसयूआई नेता हैं और वर्तमान में एनएसयूआई मुम्बई के अध्यक्ष हैं, दोनों की शादी इसी साल फरवरी में हुई है। फरवरी में जब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी लखनऊ में पार्टी कार्यकर्ताओं से मिल रही थीं उसी क्रम में करिश्मा ने प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी और लगे हाथ अपनी शादी का कार्ड (निमंत्रण पत्र) भी प्रियंका को थमा दिया था. जाहिर है प्रियंका गांधी उनकी शादी में तो नहीं पहुंची लेकिन उपचुनाव की टिकट के लिए जब करिश्मा ठाकुर ने आवेदन किया तो इस बार प्रियंका का आशीर्वाद मिल गया।

 

यूएसपी- युवा प्रत्याशी होने के साथ सबसे कम उम्र की है बल्कि चुनाव की न्यूनतम उम्र भी करिश्मा ने 15 सितंबर को ही पूरी की है, इससे पहले उनकी उम्र तक नहीं थी। छात्र राजनीति की अच्छी समझ है, दिल्ली विवि में सचिव पद संभाल चुकी हैं। इसी के साथ पिता और पति दोनों ही राजनीतिक पृष्ठभूमि से है। जिस कारण राजनीति तो विरासत में मिली है लेकिन गोविंद नगर विधान सभा के लिए जितनी नई करिश्मा है उतनी नई करिश्मा के लिए यह विधान सभा।

युवाओं पर हैं पकड़, लेकिन जमीनी स्तर पर पस्त

सपा प्रत्याशी सम्राट विकास यादव यह छात्र राजनीति में काफी समय से सक्रिय हैं और इसी के साथ युवा चेहरा भी है। पार्टी को 12 दावेदारों ने अपने नाम भेजे थे लेकिन पार्टी ने अपना इस युवा नेता पर उम्मीद जताते हुए टिकट दी है। यादव का यह पहला चुनाव है और इसी के साथ सक्रिय और मुख्य धारा की राजनीति में आने का पहला अनुभव भी। 

यू्एसपी- कई जिलों में बतौर प्रभारी अपनी छाप छोडऩे वाले और गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र में एकमात्र सपा पार्षद की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले सम्राट विकास पार्टी की पसंद बने। 32 वर्षीय विकास मसवानपुर के निवासी हैं और समाजवादी छात्र सभा में वे प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। इसी के साथ एक युवा वर्ग यादव को पसंद करता है लेकिन जमीनी स्तर में इनकी पकड़ कुछ कम है। जिसका नुकसान सम्राट को चुनाव  देखने को मिल सकता है।

एक बार हार दोबारा चुनाव के लिए तैयार

कांग्रेस से आए बसपा प्रत्याशी देवी तिवारी कांग्रेस पीसीसी सदस्य और सालों तक विभिन्न पदों पर रहे। बसपा में उनके जाने में राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्र की अहम भूमिका रही। देवी तिवारी और मिश्र रिश्ते में समधी हैं। शहर में 70 के दशक में मेयर रहे भगवत प्रसाद तिवारी के बेटे देवी तिवारी ने 1984 से कांग्रेस में अपनी यात्रा शुरू की थी। लम्बे समय तक युवक कांग्रेस, प्रदेश कांग्रेस और शहर-ग्रामीण इकाई में महामंत्री जैसे तमाम पदों पर रहे। कांग्रेस ने 2012 के विधानसभा चुनाव में कल्याणपुर से अपना प्रत्याशी भी बनाया था लेकिन वह उस चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके। गोविन्द नगर में बसपा को किसी ब्राह्मण प्रत्याशी की जरूरत थी। 

यूएसपी- ब्राह्मण प्रत्याशी होने के साथ कई सालों से संगठन में होने के कारण चुनाव का अनुभव। इनके पिता कानपुर के पूर्व मेयर रह चुके हैं। अभी अपनी पार्टी से छलांग लगाकर बहन जी के साथ हो लिए है। इनका भी इस विधान सभा से कुछ ज्यादा लेना-देना नहीं है।

यह चुनाव कई मामलों में दिलचस्प होने वाला है क्योंकि इस चुनाव में किसी भी पार्टी ने पैराशूट प्रत्याशी न उतारकर संगठन से जुड़े व्यक्तियों को मौका दिया। पिछले दो चुनाव में भाजपा  की परंपरागत रही सीट होने के वजह से भाजपा के साथ संघ भी अपनी पूरी ताकत झोंक चुका है। वहीं सबसे पहले प्रत्याशी के रूप में अपना प्रचार शुरू करने वाली करिश्मा ठाकुर निष्कर्ष पड़ी कांग्रेस को दोबारा उठाने के साथ अंर्तकलह के साथ बाहरी प्रत्याशी होने के झमेले को झेल रही है। वहीं सपा के विकास की छवि युवा नेता के रूप में तो है लेकिन चुनाव में वो टक्कर देते नहीं दिख रहे हैं बल्कि सिर्फ पार्टी कोरम पूरा करने का काम कर रहे हैं। इसी तरह बसपा के देवी तिवारी भी अपनी कैडर वोट को छोड़ कहीं भी ज्यादा ताकत झोकते नहीं दिख रहे हैं। इस सभी परपंच के बीच देखने वाली बात यह है कि 24 अक्टूबर को किसके घर में दीवाली मनती है और किसका इस चुनाव के बाद दिवाला निकलता है?

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