जापान आज दुनिया में स्वच्छ्ता के मामले में एक मिसाल के तौर पर जाना जाता है…

उत्तर प्रदेश, खबर-सार

निमेष दुबे, भोपाल।

आखिर क्या वजह है कि देश को आज़ाद हुए 70 साल होने के बाद भी इस आधुनिक दौर में देश के नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने का प्रयत्न सरकार को लगातार करना पड़ रहा है। “चाहे हम यूपीए की निर्मल भारत अभियान की बात करें या वर्तमान में एनडीए की स्वच्छ भारत अभियान की दोनों सरकारों के लाखों करोड़ों रुपए बहाने के बाद भी आखिर क्या वजह है की देश में 1999 में शुरू हुए निर्मल भारत अभियान से आज 2019 तक के स्वच्छ भारत अभियान में सरकार लगातार नागरिकों को स्वच्छ्ता के प्रति जागरूक करने में असफल रही है।”

वहीं दूसरी ओर जापान जैसा देश आज दुनिया में स्वच्छ्ता के मामले में एक मिसाल के तौर पर जाना जाता है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक जापान में सूजी या ओ-सोजी नामक परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसके तहत जापान के लोगों को बचपन में ही स्कूल के समय से सफाई के प्रति सजग रहना सिखाया जाता है , प्रतिदिन स्कूल की छुट्टी होते ही हर छात्र को पीछे रखे हुए जोकिन( सफाई का कपड़ा ) से अपनी अपनी टेबल कुर्सी को साफ करना होता है और हफ्ते में एक दिन स्कूल के विद्यार्थी अपनी अपनी कक्षाओं को साफ करते हैं ,जिससे सारा स्कूल साफ रहता है और जब विद्यार्थी खुद से स्कूल परिसर की सफाई करते हैं तो बह परिसर को गंदा भी नहीं करते जिससे स्वच्छ्ता हमेशा बनी रहती है। वहीं दूसरी ओर अगर हम भारत की बात करें तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा ये हिदायत है कि सरकारी स्कूल में विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार का काम करवाना गैरकानूनी है।

 

लेकिन अगर हम प्राचीन भारत की गुरुकुल पद्धति पर नज़र डालें तो पाएंगे कि उस समय राजा महाराजाओं के बच्चे भी घर से दूर जंगलों में गुरुकुल( आश्रम ) में शिक्षा प्राप्त किया करते थे, और आश्रमों की साफ-सफाई और स्वच्छ्ता की जिम्मेदारी इन्ही शिष्यों की हुआ करती थी, चाहे वो शौंचालय साफ करने की जिम्मेदारी ही क्यों न हो और शिष्य सफाई करते भी थे क्योंकि शिष्य और मनुष्य होने के नाते उनका ये कर्तव्य था कि अपने आस पास स्वच्छ्ता कायम रखें तथा ये सफाई की प्रक्रिया बच्चों को आत्मनिर्भर होना भी सिखाती थी। लेकिन वक़्त निकला और अंग्रेजों की हुकूमत के साथ ही गुरुकुल , स्कूल सिस्टम या कॉन्वेंट में बदल गए। अंग्रेजों के आने से पश्चिमि सभ्यता भारत आई और धीरे धीरे लोगों ने उसे अपनाना शुरू किया जिससे सभ्यता मजबूत हो गई। और आज इसी पश्चिमी सभ्यता के चलते भारत के लोग आत्मनिर्भर न हो कर दूसरों पर आश्रित हैं जिस वजह से आज भी सरकार को स्वच्छ्ता के प्रति नागरिकों को जागरूक करना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर जापान इन पश्चिम सभ्यताओं से दूर रहा और दुनिया के सबसे स्वच्छ देशों की सूची में शुमार है।

ऐसा कई दफ़ा हुआ जब जापानियों ने अपनी स्वच्छ्ता का परिचय देते हुए दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया। ब्राज़ील (2014) और रूस (2018) में हुए वर्ल्ड कप फुटबॉल प्रतियोगिताओं के दौरान दुनिया यह देखकर दंग रह गई थी कि जापानी फुटबॉल प्रेमी दर्शक मैच के बाद स्टेडियम में फैला कचरा उठाने के लिए रुक जाते थे.

जापानी खिलाड़ी भी अपने ड्रेसिंग रूम में कोई गंदगी नहीं छोड़ते थे. फ़ीफ़ा की जनरल कोऑर्डिनेटर प्रिसिला जैनसेन्स ने ट्वीट किया था- “सभी टीमों के लिए जापान की टीम मिसाल है!”वहीं दूसरी ओर हमने ये भी देखा कि साल 1996 और 2019 के क्रिकेट विश्वकप में श्रीलंका और न्यूज़ीलैंड से हारने के बाद भारतीय दर्शकों ने गुस्से में खेल मैदान में आग लगा दी और कचरा फेंका।

भारत में गंगा जैसी बड़ी नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए जापान के पास तकनीक मौजूद , भारत में वायु प्रदूषण को भी कम करने के लिए जारी है जापान का काम


जापानी नदी विज्ञानी ताकेओ टी ने बीबीसी को बताया कि जापान के पास माइक्रोबबल टेक्नॉलजी मौजूद है जिसकी मदद से जापान के क्योटो शहर की वोल्गा नदी को साफ किया गया है और इस प्रौद्योगिकी का सफल प्रयोग अमेरिका, चीन एवं कोरिया में भी हो रहा है। बताया कि इस तकनीक से नदी तालाब ही नहीं समुद्र के प्रदूषित पानी को भी पीने योग्य बनाया जा सकता है। यही तकनीक भारत भी उपयोग कर सकता है।

जापान ने भारत को वायु प्रदूषण की लगातार गम्भीर होती समस्या से निपटने में मदद की पेशकश की थी. भारत में जापान के राजदूत केंजी हिरामत्सु ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से मुलाकात कर जापान के अनुभव से मदद की पहल की थी. हिरामत्सु ने डॉ. हर्षवर्धन को बताया कि 60 और 70 के दशक में जापान को भी ऐसी ही समस्या से जूझना पड़ा था और जापान की तकनीक *ब्लू स्काई* की मदद से अब काफी हद तक वायु प्रदूषण में जापान को राहत मिल है।

जब भी दुनिया के किसी भी कौन में स्वच्छता की बात होती है तो गांधी का नाम जरूर आता है। गांधी सत्य को भगवान कहते थे और स्वच्छ्ता को धर्म। गांधी भी अपने आश्रम और शौचालय की सफाई खुद ही करते थे और अपने इस क्रिया से आत्मनिर्भर होने की शिक्षा दुनिया को दिया करते थे। जापान के लोगों ने तो गांधी के इन विचारों को अपने जीवन में उतार लिया अगर हम भारतीय भी गांधी के इन विचारों को अपनालें तो वो दिन दूर नही जब हम स्वच्छ्ता के मामले में जापान से भी आगे होंगे।

बहरहाल देश के प्रधानमंत्री एवं तमाम बड़े राजनेता , अभिनेता , खिलाड़ी लगातार इस प्रयास में हैं कि भारत को भी जापान के माफिक स्वच्छ और देश के नागरिकों को जापान के नागरिकों के समान स्वच्छ्ता के प्रति आत्मनिर्भर एवं सजग बनाया जा सके…..उसके लिए लगातर देश के सभी प्रभावी लोग प्रधानमंत्री के साथ जोरों शोरों से अपने आस पास सफाई रख कर स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के बेजोड़ कोशिश कर रहे हैं।


 

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One thought on “जापान आज दुनिया में स्वच्छ्ता के मामले में एक मिसाल के तौर पर जाना जाता है…

  • बहुत ही बढ़िया जानकारी प्रेषित की गई है यदि देश के प्रत्येक नागरिक सोच ले की उसे स्वच्छता बनाए रखना है,तो दुनिया का कोई भी देश स्वच्छता में हम से आगे नहीं होगा । परंतु इतनी मजबूत इच्छा शक्ति हर नागरिक में होना चाहिए। निमिष द्वारा तैयार की गई यह रिपोर्ट निश्चित रूप से देश के नागरिकों को स्वच्छता की ओर जागरूक करने का काम करेगी।

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