हम उस देश के वासी हैं जिस देश में चिकित्सा डंडे से होती है…

साहित्य समागम

मनोज कांत मिश्र|

मर्यादा पुरुषोत्तम राम जब घर से बाहर वन के लिए निकले तो अपने समस्त राजसी संशाधन छोड़ दिये और एक सन्त वेश में जंगलो में रहे और राक्षसों से युध्द हेतु मात्र उनके पास धनुष बाण थे और पृथ्वी पर रामराज्य की स्थापना किये ।

आज वही परिदृश्य है भारत के सामने जहाँ हम विकासशील व्यवस्था में रह रहे हैं, आज कोरोना को हराने के लिए पूरा देश प्रयासरत है लेकिन मेरे अनुसार एक डंडे ने पूरे देश की चिकित्सा कर दी । पूरा लॉक डाउन सफल बनाने का श्रेय जाता है पुलिस के उन जवानों को जिनके डंडे की दम पर आज हम मजबूती से कोरोना से लड़ रहे है , अगर ये डंडा ना होता तो शायद हम आज सुरक्षित ना होते ।

मेरी व्यक्तिगत तौर पर वरिष्ठ चिकित्सकों से बात हुई उन्होंने ने भी इस बात को स्वीकारा कि हमारे पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं अन्य विकसित देशों की अपेक्षा लेकिन एक डंडे ने पूरी चिकित्सा कर दी , क्यों की कोरोना की जंग में सामाजिक दूरी का अनुपालन अगर अच्छे से कराया है तो इन पुलिसकर्मियों ने कराया है क्योंंकि इसका इलाज ना के बराबर है वही हम  मजबूती से आज कोरोना से लड़ रहे है , इसका पूरा श्रेय पुलिस कर्मियों को जाता है ।
रामचरित मानस में विघ्न विनाश हेतु कहा गया है ..
“सकल विघ्न व्यापहि नहिं तेही।
राम सुकृपा बिलोकहिं जेही।।”
हमें जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है कभी आर्थिक, सामाजिक या किसी भी तरह की परेशानियां जीवन में लगी रहती हैं। इनके कारण जीवन में स्थिरता नहीं आ पाती है यही हाल है आज देश इस महामारी के प्रकोप से मजबूत जंग लड़ रहा है और निश्चय ही हम ये जंग जीतेंगे क्यों की ये पुलिसकर्मी हमारे मजबूत सारथी है जो कोरोना को भारत में हराने में सक्षम हैं ।


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