पंडित जसराज जी

पंडित जसराज ने क्यों लिया था बाल न कटवाने का प्रण?

सितारे भौकाली

पंडित जसराज पहले भारतीय संगीतकार बने जिनके नाम पर रखा गया क्षुद्रग्रह का नाम

“इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन (आईएयू) ने भारतीय शास्त्रीय गायक व पद्म विभूषण से सम्मानित पंडित जसराज के नाम पर एक एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) का नाम रखा है। मार्स और ज्यूपिटर के बीच स्थित इस क्षुद्रग्रह की खोज 2006 में हुई थी। पंडित जसराज पहले भारतीय संगीतकार बन गए हैं जिनके नाम पर क्षुद्रग्रह का नाम रखा गया है।”

दिल्ली डेस्क। 14 बरस की उम्र का बालक, एक दिन अपने गुरू की बात सुनकर खुद को अपमानित महसूस करता हुआ हमेशा के लिए छोड़ दे जाता है अपना तबला वादन और शुरू करता है अपनी गायकी की शिक्षा। यह कोई और नहीं हम बात कर रहे हैं पं. जसराज जी की। जिनकी जीवन में एक घटना ने उन्हें गायकी की ओर मोड़ दिया। वाक्या कुछ यूं था कि-

1945 में लाहौर में कुमार गंधर्व के साथ  एक कार्यक्रम में तबले पर संगत कर रहे थे। कार्यक्रम के अगले दिन कुमार गंधर्व ने उन्हें डांटा था, ‘जसराज तुम मरा हुआ चमड़ा पीटते हो, तुम्हे रागदारी के बारे में कुछ नहीं पता।’ उस दिन के बाद से उन्होंने तबले को कभी हाथ नहीं लगाया और तबला वादक की जगह गायकी ने ले ली। तबला त्याग दिया और प्रण लिया कि जब तक वे शास्त्रीय गायन में विशारद प्राप्त नहीं कर लेते, अपने बाल नहीं कटवाएँगे। इसके पश्चात् उन्होंने मेवाती घराने के दिग्गज महाराणा जयवंत सिंह वाघेला से तथा आगरा के स्वामि वल्लभदास जी से संगीत विशारद प्राप्त किया।

राज संगीतज्ञ की घोषणा वाले दिन हुआ पिता का देहांत
पंडित जसराज क जन्म 28 जनवरी 1930 को हुआ था, संगीत तो उन्हें विरासत में मिला था उनके परिवार की 4 पीढ़ियों तक हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत को एक से बढ़कर एक शिल्पी देने का गौरव प्राप्त है। उनके पिताजी पंडित मोतीराम जी स्वयं मेवाती घराने के एक विशिष्ट संगीतज्ञ थे। पं० जसराज को संगीत की प्राथमिक शिक्षा उन्हीं से मिली परन्तु जब वे मात्र 3 वर्ष के थे, प्रकृति ने उनके सर से पिता का साया छीन लिया। पंडित मोतीराम जी का देहांत उसी दिन हुआ जिस दिन उन्हें हैदराबाद और बेरार के आखिरी निज़ाम उस्मान अलि खाँ बहादुर के दरबार में राज संगीतज्ञ घोषित किया जाना था।

हमेशा चाहत थी कि इंदौर में हो मेरा जन्म
इंदौर का होलकर घराना काफी प्रसिद्ध रहा है। उस्ताद अमीर खां, पंडित कुमार गंधर्व, लता मंगेशकर, किशोर कुमार सहित इतनी हस्तियां यहां से हैं। कई बार पंडित जी कहा करते थे कि कहां मैं हरियाणा में पैदा हो गया। ईश्वर इंदौर में ही जन्म दे देता तो इन सभी की सोहबत मिलती।

सम्मान और पुरस्कार
1.पद्म विभूषण (2001)
2.पद्म भूषण
3.पद्म श्री
4.संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
5.मास्टर दीनानाथ मंगेशकर अवार्ड
6.लता मंगेशकर पुरस्कार
7.महाराष्ट्र गौरव पुरस्कार

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