शिव के समाज का बिगड़ा शास्त्र…

सोशल स्टार

तेजस ठाकुर की वॉल से।

ऑफिस से रूम आते तक रास्ते में पांच से छह गाड़ियों पर शिव के ये गुस्से वाली तस्वीर देखी… इसको देखते हुए अम्मा की याद आ गई… अम्मा अक्सर शाम को पूजा के बाद मंत्र बोलतीं थी-

“कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।”

इसका मतलब है शिव कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले है और करुणा के जो साक्षात् अवतार हैं… ये शिव की सबसे सामान्य परिभाषा है, जो आपको हर मंदिर में सुनाई दे जाएगी।

इसके अलावा शिव को दो और तरीकों से परिभाषित किया गया है, जब समुद्र पार जाने के लिए राम शिव की स्तुति करते हैं तो कहते हैं-

“नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्”

वहीं जब रावण शिव को प्रसन्न करने के लिए स्तुति करता है तो कहता है-

“जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌”

अब यहां हैरत की बात है हमने राम के नाम पर लड़ाई लड़ ली, लोगों की माॅब लिंचिंग कर ली, लेकिन दर हकीकत हमको कभी राम के शिव पसंद ही नहीं आए। हमको हमेशा रावण के शिव पसंद आए, इसी तरह की तस्वीर आप हनुमान, राम और यहां तक की कृष्ण की भी देखेंगे।

लेकिन अचानक से क्या हुआ कि हमेशा सौम्य अवतार में नजर आने वाले ये सभी देवता अब गुस्से में नजर आने लगे हैं। इन सबको थोड़ा और ध्यान से देखेंगे तो कई गाड़ियों के पीछे दो तलवारों के बीच राजपूत, जाट और ब्राह्मण तक लिखा दिख जाएगा, मेरे एक दोस्त ने फेसबुक पर अपने नाम में ‘जय दादा परशुराम’ लिख रखा है। यहां फिर वही सवाल है कि आखिर हुआ क्या है, जो समाज में इतनी नफरत एकदम से आ गई।

इसका सबसे बाजिब रीजन दिनकर ने बताया है, दिनकर अपनी किताब में लिखते हैं, जब समाज की प्रथा पर प्रत्यक्ष प्रहार होता है, तो समाज कछुए के जैसे अपने खोल के अंदर छुप जाता है। जैसे ही धर्म और जाति पर प्रत्यक्ष प्रहार हुआ समाज ने अपने आवरण को कठोर कर लिया और किसी भी तरह के सुधार को नकार दिया।

बहुत से लोग इसकी वजह शायद मोदी को कहेंगे पर मैं जियो को मानता हूं, पिछले चार सालों में हर इंसान के पास सोर्स आॅफ मैसेज आ गया। अब जैसे ही पिछड़ों ने अपने हक की आवाज बुलंद की तो सवर्ण को अपना वर्चस्व हिलता नजर आया। वहीं धर्म के नाम जिन हिंदुओं ने हमेशा खुद को प्रताड़ित समझा उनकी कुंठा खुलकर सामने आ गई, रही सही कसर टीबी डिबेट में बैठने वाले जाहिल मौलानाओं ने पूरी कर दी। इन सब कुंठा और असुरक्षा के बीच कुछ संगठनों ने शातिर तरीके से फेक न्यूज का जाल बुना और नेहरू, गांधी, मौलान आजाद, इंदिरा सब को विलेन बना के पेश कर दिया।

अब यही नफरत हमको पोस्टरों पर और गाड़ी के शीशों पर देखने को मिल रही है नहीं तो नंद वंश, मौर्य वंश और गुप्ता वंश जैसे पिछड़े और दलित वर्णों ने भारत पर हजारों साल राज किया है। यहां तक की वशिष्ठ खुद एक मछुआरे थे पांडू और धृतराष्ट्र इन्हीं के पुत्र माने गए है, लेकिन पिछले कुछ वक्त में मैसेज तो आसानी से हम तक आया लेकिन किस रूप में आया इसकी जांच नहीं हुई और ये अति के गबार बुद्धिजीवियों ने जिस तरह समाज के एक वर्ण को सारे इतिहास का दोषी बताकर नीचा दिखाने की कोशिश की ये गाड़ियों के शीशों पर लगी शिव हनुमान और राम की गुस्से वाली तस्वीर उसी का नतीजा है और शायद इसीलिए मार्शल मैक्लूहान ने कहा था ।

“मीडियम इज द मैसेज”

अपनी राय हमें नीचे कमेंट पेटी या the.journalistss1@gmail.com के जरिये भेजें.

फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब  पर हमसे जुड़ें |


One thought on “शिव के समाज का बिगड़ा शास्त्र…

  • सही बात पहले खबरे और अफवाहों में फर्क होता था परन्तु आज हम अफवाहों और सत्य खबर की पहचान नहीं कर पाए रहे हैं जिससे हर व्यक्ति एक दूसरे के धर्म के प्रति सहानुभूति नहीं दिखा रहा है और समाज में जातिवाद की समस्या भी बढ़ रही है ऐसा रहा तो जल्द भारत देश कई हिस्सों में भी बट सकता है।

Leave a Reply