कहने को अर्धनारीश्वर, पर नहीं मानते इंसान

सोशल स्टार

विभावरी दीक्षित, भोपाल।

लड़का हुआ तो NDA में जायेगा और लड़की हुई तो टीचर बनेगी, अगर बच्चा लड़का है तो नीला पहनेगा और लड़की है तो गुलाबी पहनेगी, लड़का क्रिकेट खेलेगा और लड़की गुड़िया से खेलेगी….हमारे समाज ने खुद को दो हिस्सों में बाट लिया है।

सालों बाद अदालत ने तो लड़के और लड़की के बीच में दबे एक तीसरे सेक्स को पहचान दे दी है लेकिन समाज के लिए अभी भी वो सिर्फ हिजड़े, छक्के, किन्नर और ताली बजाने वाले हैं।
समाज ने दो तरह के बायोलॉजिकल सेक्स के साथ ही खुद को भी दोहरे व्यक्तित्व में ढाल लिया है। पहले व्यक्तित्व में वो अर्धनारीश्वर को सर्वशक्तिमान के रूप में पूजता है और दूसरे व्यक्तित्व में वो तथाकथित “किन्नरों” को देखते ही अपना रास्ता बदल लेता है।
परिवार में जब 6 साल के बच्चे को फ्रॉक पहनने या नेलपॉलिश लगाने का शौक रखते देखा जाता है तो उसे लड़को की तरह बनने के लिए पीटा जाता है , आस-पड़ोस के अंकलों और चाचा-फूफा को अचानक उस बच्चे को चूमने का मन करता है। वही बच्चा जब 20 साल की उम्र में लड़कियों की चाल में कॉलेज जाता है तो साथ वाले बाथरूम में घेरकर उसके कपड़े उतारकर यह देखना चाहते हैं कि वो अंदर से कैसा दिखता है। यह बात जब वो अपने घर पर बताता है तो उसे गंदा कहकर घर से निकाल दिया जाता है। फिर जाना पड़ता है उसे अपने अलग किये समाज में जहाँ उसे बिंदी, चूड़ियाँ और साड़ी पहनने की तो पूरी आज़ादी होती है लेकिन पेट पालने के लिए ट्रेन में ताली बजानी पड़ती है या बाज़ारों में वसूली करनी होती है।

“मज़े की बात तो यह है कि जब वो हमारे यहाँ बच्चा पैदा होने पर या शादी-ब्याह मैं आते हैं तो विष्णु का अवतार कहलाते हैं और जब बाज़ार या ट्रेन में दिख जाते हैं तो ताली बजाने वाले मवाली कहलाते हैं।”
यह कहानी एक या दो लोगों की नहीं है बल्कि भारत में यह कहानी 4.9 लाख से भी ज़्यादा लोगों की है , जिनके साथ उन्हीं के भाइयों-रिश्तेदारों द्वारा रेप किया जाता है, घर से निकाल दिया जाता है और समाज में मीठा और छक्का कहा जाता है। जब इन्हें यह समझ में आ गया कि यह वह दोगला समाज है जो सिर्फ उगते हुए सूरज के सामने झुकता है तो इन्होंने जन्म दिया के. पृथिका याशिनी, लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, मधु बाई किन्नर, पद्मिनी प्रकाश और इनके जैसे कई चमकते गौरव को जिन्होनें देश में वो मुकाम हासिल किया जिसमें उनके लिए समाज ने ताली बजायी।


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