क्या मोदी सरकार को अपने ही संस्थानों के आंकड़ों पर भरोसा नहीं है?

सोशल स्टार

निमेष, भोपाल।

आंकड़ों से जुड़े विवाद लगातार सामने आ रहे हैं , अभी कुछ दिन पहले सरकार ने नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस( एनएसओ ) के 2017-18 के उपभोक्ता ख़र्च सर्वे डेटा को जारी नहीं करने का फ़ैसला किया है।

क्या होगा अगर उपभोक्ता ख़र्च सर्वे डेटा जारी नहीं होगा ?

उपभोक्ता खर्च किसी व्यक्ति की क्रय शक्ति, याने खर्च करने की छमता को दर्शाता है। उपभोगता खर्च के हिसाब से ही देश में गरीबी या अमीरी का आंकलन किया जाता था , अब डाटा सरकार ने रोक दिया है तो हमे यह पता नहीं चल पाएगा कि साल 2017-2018 में भारत में गरीबी बढ़ी या कम हुई । जाहिर सी बात है गरीबी बढ़ी ही होगी और सरकार अपनी असफलता को लोगों से दूर रखना चाहती है।

बिज़नेस स्टैण्डर्ड ने अपनी एक खबर में दावा किया है कि “एनएसओ” का डाटा लीक हुआ है और देश में 2017-2018 में गरीबी पिछले 40 सालों की तुलना में अपने चरम पर है।अगर बिज़नेस स्टैण्डर्ड का यह दावा सही है, तो यह तो निश्चित है कि सरकार जनता से आंख नही मिला पा रही है ,इसलिए डाटा छुपाया जा रहा है। सरकार गरीबी कम करने में असफल सिध्द हुई है।

इसी हफ़्ते पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ‘द हिन्दू अख़बार” में एक आलेख लिखा था और मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि आँकड़ों के प्रकाशन पर पहरा लगा दिया गया है. पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा था कि वो इस बात को एक अर्थशास्त्री के तौर पर कह रहे हैं. मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश के इंस्टिट्यूशन को कमज़ोर किया जा रहा है और इससे अर्थव्यवस्था को नुक़सान होगा साथ ही वैश्विक इस्तर पर भारत के संस्थानों की विश्वसनीयता भी कम हो रही है।

अब यह है कि देश में गरीबी कितनी है यह जानने के लिए हमारे पास कोई जानकारी नही होगा । इससे सरकार तो अपनी छवि सुरक्षित रख लेगी , प्रधनमंत्री भी अपने भाषणों में गरीबों के शुभचिंतक होने की बात कर लेंगे। मगर देश के जो गरीब परिवार हैं उनकी इस्थिति और भी दयनीय हो जाएगी।

कब तक सरकार अपने मुख्य वादों से भागेगी और साम्प्रदायिकता ,जाती , और धर्म जैसे झूठे मुद्दों के पीछे छिपेगी।

अब राममंदिर और 370 के बाद ऐतिहासिक शख्सियतों को बदनाम करने का काम चरम पर है ,जो सरकार के असफल कार्यों की आलोचना कर रहे हैं, उन लोगों की आवाज को सरदार-नेहरू मुद्दों के बीच दवाया जा रहा है , और देश की जनता को गुमराह करा जा रहा है ।


 

अपनी राय, लेख और खबरें हमें नीचे कमेंट पेटी या the.journalistss1@gmail.com या व्हाट्सएप 6269177430 के जरिये भेजें. फेसबुकट्विटरयूट्यूब  हमसे जुड़ेें

Leave a Reply