आज का नहीं 1528 से चला आ रहा अयोध्या राम मंदिर और बाबरी विवाद…

स्वदेश

यूपी डेस्क।

अयोध्या में राम जन्मभूमि पर रामलला के मंदिर के निर्माण को लेकर आज 16 अक्टूबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट में बहस का अंतिम दिन है और शाम 5 बजे बहस खत्म होने के साथ ही पूरा देश फैसले को लेकर निगाहें लगाए हुए हैं। ऐसे में किसी अफरातफरी को टालने के लिए पूरा शहर छावनी की शक्ल ले चुका है| राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद आज का नहीं, बल्कि सदियों पुराना है| चलिए जानें, अयोध्या की इस विवादित भूमि पर कब-कब, क्या-क्या हुआ है

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1528-29 – बाबर ने एक मस्जिद बनवाई, जिसे बाबरी मस्जिद नाम दिया गया। हिंदू मान्यता के अनुसार इसी जगह भगवान राम का जन्म हुआ था और हिंदू संगठनों का आरोप रहा कि राम मंदिर को तुड़वाकर मस्जिद बनाई गई। हालांकि कई शोधकर्ताओं का कहना है कि असल विवाद की शुरुआत 18वीं सदी में हुई।

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1853– इस जगह पर मंदिर-मस्जिद को लेकर पहला विवाद, जिसमें हिंदुओं ने आरोप लगाया कि मंदिर को तोड़कर मुस्लिमों ने अपना धार्मिक स्थल बनवाया। इस बात को लेकर पहली बार हिंसा के प्रमाण मिलते हैं।

1859– अंग्रेजी हुकूमत ने मध्यस्थता करते हुए विवादित स्थल का बंटवारा कर दिया और तारों की एक बाड़ खड़ी करना दी ताकि अलग-अलग जगहों पर हिंदू-मस्लिम अपनी-अपनी प्रार्थना कर सकें।

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1885– विवाद ने इतना गंभीर रूप ले लिया कि पहली बार ये अदालत पहुंचा। हिंदू साधु महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में बाबरी मस्जिद परिसर में राम मंदिर बनवाने के लिए इजाजत मांगी, हालांकि अदालत ने ये अपील ठुकरा दी। इसके बाद से मामला गहराता गया और सिलसिलेवार तारीखों का जिक्र मिलता है।

1949– हिंदुओं ने मस्जिद में कथित तौर पर भगवान राम की मूर्ति स्थापित कर दी। तब से हिंदू ही पूजा करने लगे और मुस्लिमों ने मस्जिद में नमाज पढ़नी बंद कर दी।

1950– फैजाबाद अदालत में एक अपील दायर कर गोपाल सिंह विशारद ने भगवान राम की पूजा की इजाजत मांगी।

1950– महंत रामचंद्र दास ने मस्जिद में हिंदुओं द्वारा पूजा जारी रखने के लिए याचिका लगाई, इसी दौरान मस्जिद को ‘ढांचा’ के रूप में संबोधित किया गया।

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1959– इसी महीने निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल के हस्तांतरण के लिए मुकदमा किया।

1961– इस दौरान तस्वीर थोड़ी बदली और उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद पर मालिकाना हक के लिए मुकदमा कर दिया।

1984– विश्व हिंदू परिषद ने बाबरी मस्जिद का ताला खोलने और इस जगह पर मंदिर बनवाने के लिए अभियान शुरू किया और इसके लिए समिति का गठन हुआ।

फरवरी 1986– एक अहम फैसले के तहत स्थानीय कोर्ट ने विवादित स्थल पर हिंदुओं को पूजा की इजाजत दे दी और ताले दोबारा खोले गए। इससे नाराज मुस्लिमों ने फैसले के विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनाई।

जून 1989- भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले में विश्व हिंदू परिषद को औपचारिक समर्थन दिया।

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नवंबर 1989- लोकसभा चुनाव के कुछ महीनों पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने बाबरी मस्जिद के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी।

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25 सितंबर 1990- बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली ताकि हिंदुओं को इस महत्वपूर्ण मु्द्दे से अवगत कराया जा सके। हजारों कार सेवक अयोध्या में इकट्ठा हुआ। इस यात्रा के बाद साम्प्रदायिक दंगे हुए।

नवंबर 1990– बिहार से आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया।

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6 दिसंबर 1992- ये विवाद में ऐतिहासिक दिन के तौर पर याद रखा जाता है, इस रोज हजारों की संख्या में कार सेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दिया और अस्थायी राम मंदिर बना दिया गया। चारों ओर सांप्रदायिक दंगे होने लगे, जिसमें लगभग 2000 लोगों के मारे जाने का रिकॉर्ड है।

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16 दिसंबर 1992– तब मस्जिद में हुई तोड़-फोड़ की जांच के लिए लिब्रहान आयोग का बनाया गया, जज एमएस लिब्रहान के नेतृत्व में जांच शुरू की गई।

सितंबर 1997– बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने इस बारे में 49 लोगों को दोषी करार दिया, जिसमें बीजेपी के कुछ प्रमुख नेताओं का नाम भी शामिल रहा।

2001- वीएचपी ने मार्च 2002 को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए डेडलाइन के तौर पर मार्क किया।

अप्रैल 2002- उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर सुनवाई आरंभ की।

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मार्च-अगस्त 2003– हाई कोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की, पुरातत्वविदों ने कहा कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष के प्रमाण मिले हैं. हालांकि इसे लेकर भी अलग-अलग मत थे ।

जुलाई 2009- लिब्रहान आयोग ने गठन के लगभग डेढ़ दशक बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी।

28 सितंबर 2010– सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज कर दी।

30 सितंबर 2010– इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा, इसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा निर्मोही अखाड़े को दिया गया।

9 मई 2011– सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।

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21 मार्च 2017- सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की समझाइश दी।

19 अप्रैल 2017– सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया।

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दिसंबर 2017– लगभग 32 नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के साल 2010 के फैसले को चुनौती दी।

8 फरवरी 2018- सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील पर सुनवाई शुरू कर दी।

20 जुलाई 2018– मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला आरक्षित रखा।

29 अक्टूबर 2018– सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जल्द सुनाई पर इनकार करते हुए केस जनवरी 2019 तक के लिए टाल दिया।

6 अगस्त 2019– रोजाना सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू की।

16 अक्टूबर 2019– सुप्रीम कोर्ट में बहस का आखिरी दिन

17 नवंबर 2019- राम मंदिर और बाबरी विवाद को लेकर फैसला आने की उम्मीद।


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