इन वजह से बढ़ा दी गई नेपाल-भारत सीमा की सुरक्षा, अब नहीं होगा आसान नेपाल से आवागमन…

स्वदेश

नेशनल डेस्क। गणतंत्र दिवस को देखते हुए नेपाल से लगने वाली सीमा पर गश्त बढ़ दी गई है। ताकि देश में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की फिराक में रहने वाले देश विरोधी तत्व दोनों देशों के बीच खुली सीमा का दुरूप्रयोग न कर सकें।

एडीजी दावा शेरपा ने नेपाल सीमा से लगने वाले जिलों के पुलिस कप्तानों को पत्र लिखकर सीमाई इलाके में लगातार गश्त करने और सीमा की सुरक्षा में तैनात एसएसबी से तालमेल बिठाकर निगहबानी करने का निर्देश दिया है। दोनों देशों को जोडऩे वाले पगडंडी रास्तों पर खासतौर से नजर रखने का निर्देश दिया है

इन जिलों से सटी है नेपाल की सीमा

जोन के छह जिलों कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती जिले की सीमा नेपाल से लगती है। दोनों देशों के बीच आवाजाही के लिए अधिकृत रास्ते निर्धारित हैं लेकिन दोनों देशों में सीमाई इलाके में रहने वाले ग्रामीणों की रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दिनभर में कई बार एक देश से दूसरे देश में आवाजाही लगी रहती है। इसके लिए उन्होंने अपनी सुविधानुसार पगडंडी रास्ते बना रखे हैं। अधिकृत रास्तों पर तो हर समय सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं, लेकिन पगडंडी रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था करना संभव नहीं है। हालांकि एसएसबी जवान लगातार गश्त कर इन रास्तों पर नजर रखते हैं लेकिन इन रास्तों से आवाजाही नहीं रुक पाती।

एक नजर में-

  • 1751 किमी लंबी है भारत से लगने वाली नेपाल की सीमा
  • 454 किमी उत्तर प्रदेश से लगती है नेपाल की सीमा
  • 300 किमी के करीब सीमा गोरखपुर जोन से जुड़ी है

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